Slip Disc Treatment aur Exercise in Hindi – Slip Disc Ka Ilaj – स्लिप डिस्क से बचने के उपाय

Slip Disc Treatment aur Exercise in Hindi at Home, Slip Disc Ka Ilaj, Lakshan, Symptoms स्लिप डिस्क से बचने के उपाय – अगर देखा जाये तोह आज के समय में हर व्यक्ति को गर्दन में दर्द, कंधो में दर्द, पीठ में दर्द, कूल्हों में दर्द, कोहनी में दर्द, पैरो का दर्द, बाजुओ में दर्द आदि सम्बंधित परेशानिया रहती है। जिसे स्लिप डिस्क की बीमारी कहा जाता है, लेकिन इसे हम किसी भी तरह की बीमारी नहीं कह सकते, परंतु हाँ ये एक तरह की शरीर की तकनिकी खराबी होती है। अगर देखा जाये तोह भारत में लगभग 20 से 25 % लोग इस परेशानी से जूझ रहे है। तोह आइये आज इस लेख मई हम स्लिप डिस्क के बारे मई पूरी तरह से जानते है।

Slip Disc Treatments in Hindi, Slip Disc Ke Gharelu Ilaj
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स्लिप डिस्क की बीमारी में डिस्क स्लिप नहीं होती है, बल्कि स्पाइनल कॉर्ड से बाहर आ जाती है। दरअसल डिस्क का बाहरी हिस्सा मजबूत मेम्ब्रेन से बना होता है और उसके बीच में तरल जालीनुमा पदार्थ भरा होता है। डिस्क में मौजूद जेली और क्यूशियन्स जैसा भाग कनेक्टिव टिस्सुस के सर्किल से बाहर निकल जाता है और आगे की तरफ बढ़ा हुआ हिस्सा स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव बनाता है। कई बार उम्र बढ़ने के साथ साथ ये तरल पदार्थ सूखने लगता है और अचानक झटके से ये मेम्ब्रेन टूटने लगती है। इसे स्लिप डिस्क कहा जाता है।

इस तरह ये छोटी सी बीमारी आपको परेशां कर सकती है, तो आइये विस्तार से जानते है इस बीमारी के होने के कारण और उपचार के बारे में।

स्लिप डिस्क होने के कारण

ये बीमारी उन् लोगो को अधिक होती है, जो पुरे दिन बैठ कर पढ़ाई, लिखाई, सिलाई, बुनाई आदि करते है, जिससे दोनों भुझाओ में दर्द हो सकता है।

या फिर ऐसा कोई काम करते है जिसमे कमर और गर्दन झुकी रहती है, इसके अलावा जो महिलाये बिना आराम किये झुक कर काम करती है और अपनी क्षमता से भी ज्यादा काम करती है, उन् महिलाओ को भी ये बीमारी हो सकती है।

जो लोग बिलकुल भी चलते फिरते नहीं है और न ही व्यायाम करते है और सारा दिन कुछ न कुछ कहते रहते है, ये रोग उन् लोगो को भी हो सकता है।

शरीर का वजन बढ़ने से या फिर दिन-रात बहुत ज्यादा वजन उठाने से रिड की हड्डी (Backbone) पर जोर पड़ता है, जिसे हड्डिया और मांसपेशिया सहन नहीं कर पति है और व्यक्ति इस बेमारी का शिकार हो जाता है।

गलत तरीके से टेढ़े-मेढ़े हो कर सोना, बहुत ज्यादा आराम दयाक सोफे पर और कुर्सी पर घंटो तक बैठे रहना, हाई पिलो का इस्तेमाल करना आदि इस रोग के कारण हो सकते है।

कई लोगो की रिड की हड्डी में जन्म से ही विकार होता है, किसी एक्सीडेंट के टाइम रिड की हड्डी पर चोट या दबाव पड़ने के कारण दर्द शुरू हो जाता है।

जिन लोगो की हड्डिया कमजोर पद जाती है या फिर जिन्हें गठिया या अस्थि संधि रोग होता है, उन् लोगो को भी ये रोग हो सकता है।

भोजन में पूरी मात्रा में खनिज, विटामिन और खास कर विटामिन-D न लेने के कारण भी ये रोग उत्पन्न हो सकता है।

स्लिप डिस्क के लक्षणों को कैसे पहचाने ?

गर्दन में अकडन और दर्द होना, चक्कर आना, छाती में दर्द होना।

कमर में सुबह के समय अकडन के साथ दर्द होना।

देर तक खड़े होने पर पैरो का सुन्न पड़ जाना, जलन होना और झनझनाहट होना।

कई बार हमारे एक पेअर या दोनों पेअर का, ऊपर या नीचे भाग में कुछ भाग सुन्न पड़ जाता है, ये इस बीमारी का मुख्य लक्षण मन जाता है।

स्पाइनल कॉर्ड को बीच मई दबाने पर हिप और थइ के आस-पास सुन्न पड़ जाना।

स्लिप डिस्क के उपचार :

स्लिप डिस्क होने पर ज्यादातर मरीजो को डॉक्टर आराम करने की ही सलाह देते है। काम से काम 2 से 3 हफ्ते तक आराम करना चाहिए और डॉक्टर के कहे अनुसार दावो का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा अगर डावाओ के सेवन के बाद आपको कुछ बदलाव महसूस हो तो डॉक्टर को दिखाए। बहुत से मामले ऐसे होते है जिनमे सर्जरी ही होती है, लेकिन सर्जरी से पहले डॉक्टर से पूरी तरह परामर्श ले कर ही इसे करवाये। इसके अलावा भी इसके कुछ उपाय है जिन्हें नीचे बताया जा रहा है।

लाइफस्टाइल में करे बदलाव : इस बिमारी से बचने का सबसे पहला उपाय ये है की आप अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करे, जैसे की उलटे हो कर न सोये, अगर आपका काम बैठे-बैठे करने का है तोह ऐसी चेयर पर बैठे जिसमे आपकी कमर को आराम रहे, शरीर का वजन न बढ़ने दे, रोजाना वाक करे, झटके से उठना-बैठना न करे, कमर झुक कर काम न करे, अगर आपको लंबी ड्राइव करना है तो कमर और गर्दन के पीछे तकिया लगा ले। इसके अलावा ज्यादा मोटे गद्दे पर न सोये और न ही ज्यादा मोटा तकिया लगाए।

योगासन को अपनाये : योगासन के द्वारा हर तरह की परेशानी दूर की जा सकती है बशर्ते आप इसे सही करे। क्योंकि ऐसे कई तरह के योगासन है जो की आपके शरीर और रिड की हड्डी को आराम पहुचने का काम करते है। इन्हें आप आसानी से घर पर ही कर सकते है, ये काफी असरदार साबित होते है।

स्ट्रेचिंग करे : स्ट्रेचिंग इस बीमारी के लिए एक बहुत ही अच्छा उपाय है, इसके द्वारा आप स्ट्रेचिंग करके बैक पेन में आराम प् सकते है, साथ ही ये बहुत ही आसान होता है। इसको करने से पहले बस एक बात का ध्यान रखना जरुरी है की आप इसको करने से पहले किसी फ़िज़ियोथेरेपिस्ट से जरूर सलाह ले ले।

एरोबिक्स करे : एरोबिक्स भी स्लिप डिस्क का एक अच्छा इलाज है, इसके द्वारा इस बीमारी में लाभ पाया जा सकता है, बस इसे करने से पहले डॉक्टर से जरूर सलाह ले।

लाइट एक्सरसाइज करे : कोई भी बीमार व्यक्ति किसी भी तरह की जोर से की जाने वाली और हायर एनर्जी लेने वाली एक्सरसाइज नहीं कर सकता है। इस तरह अगर आप छोटे-मोटे और आसानी से किये जाने वाले व्यायाम और एक्सरसाइज कर सकते है तोह उन्हें करिये, इससे आपको आराम मिलेगा।

इस तरह ऊपर अपने जाना स्लिप डिस्क नमक बीमारी के बारे में। जिससे आप इसके बारे में अछि तरह जान कर इसका इलाज करा सकते है और इस बीमारी से बच सकते है।

दोस्तों Slip Disc Ka Ilaj का ये लेख आपको कैसा लगा कमेंट कर के बताये और अगर आपके पास हिंदी में कोई टिप्स है तो हमारे साथ share करे।

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