Neelam Stone Benefits in Hindi – Blue Sapphire Benefits – नीलम रत्न के फायदे

Neelam Stone Benefits in Hindi, Blue Sapphire Benefits in Hindi, Benefits of Wearing Neelam Stone Ratna, नीलम रत्न के फायदे – यहाँ आप सभी ( Neelam Ratna Ke Labh Hindi Me  ) नीलम रत्न को पहनने के फायदे जान सकते है । इसी के साथ आप सभी पहचान ( Identity ), उपरत्न ( Substitute ), मूल्य ( Price ) और नीलम रत्न कब और कैसे पहने ( How to Wear Neelam / Blue Sapphire Gemstone ) ।

शनि ग्रह का रत्न नीलम, जिसे अंग्रेजी में ‘ब्लू सेफायर’ कहते हैं वास्तव में उसी श्रेणी का रत्न है जिसमें माणिक रत्न आता है। ज्योतिष विज्ञान में इसे कुरूंदम समूह का रत्न कहते हैं। इस समूह में लाल रत्न को माणिक तथा दूसरे सभी को नीलम कहते हैं। इसलिए नीलम सफेद, हरे, बैंगनी, नीले आदि रंगों में प्राप्त होता है। सबसे अच्छा नीलम नीले रंग का होता है जैसे आसमानी, गहरा नीला, चमकीला नीला आदि।

Neelam Stone Benefits, Blue Sapphire Benefits
Neelam / Blue Sapphire Stone Benefits, Prcie, Substitutes in Hindi Language

नीलम रत्न की प्राकृतिक उपलब्धता ( Availability of Neelam Stone ):

माणिक, हीरा, पन्ना और पुखराज की तरह नीलम रत्न भी मिनरल डिपोजीशन से बना है। अत: यह भी बड़ी-बड़ी खानों से निकाला जाता है। सबसे अच्छा नीलम भारत में पाया जाता है। भारत के अलावा आस्ट्रेलिया, अमेरिका, अफ्रीका, म्यांमार और श्रीलंका में भी नीलम की खानें पाई जाती हैं।

विज्ञान और नीलम ( Science & Neelam ):

माणिक्य और नीलम की वैज्ञानिक संरचना बिल्कुल एक जैसी है। वैज्ञानिक भाषा में कहें तो माणिक्य की तरह ही नीलम भी एक एल्युमीनियम ऑक्साइड है। एल्युमीनियम ऑक्साइड में आइरन, टाइटेनियम, क्रोमियम, कॉपर और मैग्नीशियम की शुद्धियां मिली होती हैं जिससे इनमें नीला,पीला, बैंगनी, नारंगी और हरा रंग आता है। इन्हें ही नीलम कहा जाता है। इसमें ही अगर क्रोमियम हो तो यह क्रिस्टल को लाल रंग देता है जिसे रूबी या माणिक्य कहते हैं।

नीलम रत्न के गुण ( Quality of Neelam Gemstone ):

यह नीले रंग का होता है और शनि का रत्न कहलाता है। ऐसा माना जाता है कि मोर के पंख जैसे रंग वाला नीलम सबसे अच्छा माना जाता है। यह बहुत चमकीला और चिकना होता है। इससे आर-पार देखा जा सकता है। यह बेहद प्रभावशाली रत्न होता है तथा सभी रत्नों में सबसे जल्दी अपना प्रभाव दिखाता है।

नीलम रत्न का प्रयोग:

नीलम को शनिवार के दिन पंचधातु या स्टील की अंगूठी में जड़वाकर सूर्यास्त से दो घंटे पहले ही बीच की अंगुली में धारण करना चाहिए। यह याद रखे कि अंगूठी में नीलम कम से कम चार रत्ती का होना चाहिए। इस नीलम को ऊं शं शनैश्चराय नम: के 23 हजार बार जाप के बाद जागृत करके पहनना चाहिए।

नीलम रत्न का विकल्प:

नीलम न खरीद पाने और अच्छा नीलम यदि न उपलब्ध हो पा रहा हो तो नीलम के स्थान पर लीलिया और जामुनिया धारण किया जा सकता है। इसके अलावा जिरकॉन, कटैला, लाजवर्द, नीला तामड़ा, नीला स्पाइनेल या पारदर्शी नीला तुरमली पहना जा सकता है।

सावधानी:

इसके साथ माणिक्य, मोती, मूंगा, पीला पुखराज आदि कभी नहीं पहनना चाहिए।

नीलम रत्न के लाभ ( Benefits of Blue Sapphire ):

नीलम शनि का रत्न है और अपना असर बहुत तीव्रता से दिखाता है इसलिए नीलम कभी भी बिना ज्योतिषी की सलाह के नहीं पहनना चाहिए। नीलम रत्न को पहनने के लिए कुंडली में निम्न योग होने आवश्यक हैं।

  1. मेष, वृष, तुला एवं वृश्चिक लग्न वाले अगर नीलम को धारण करते हैं तो उनका भाग्योदय होता है।
  2. चौथे, पांचवे, दसवें और ग्यारवें भाव में शनि हो तो नीलम जरूर पहनना चाहिए।
  3. शनि छठें और आठवें भाव के स्वामी के साथ बैठा हो या स्वयं ही छठे और आठवें भाव में हो तो भी नीलम रत्न धारण करना चाहिए।
  4. शनि मकर और कुम्भ राशि का स्वामी है। इनमें से दोनों राशियां अगर शुभ भावों में बैठी हों तो नीलम धारण करना चाहिए लेकिन अगर दोनों में से कोई भी राशि अशुभ भाव में हो तो नीलम नहीं पहनना चाहिए।
  5. शनि की साढेसाती में नीलम धारण करना लाभ देता है।
  6. शनि की दशा अंतरदशा में भी नीलम धारण करना लाभदायक होता है।
  7. शनि की सूर्य से युति हो, वह सूर्य की राशि में हो या उससे दृष्ट हो तो भी नीलम पहनना चाहिए।
  8. कुंडली में शनि मेष राशि में स्थित हो तो भी नीलम पहनना चाहिए।
  9. कुंडली में शनि वक्री, अस्तगत या दुर्बल अथवा नीच का हो तो भी नीलम धारण करके लाभ होता है।
  10. जिसकी कुंडली में शनि प्रमुख हो और प्रमुख स्थान में हो उन्हें भी नीलम धारण करना चाहिए।
  11. क्रूर काम करने वालों के लिए नीलम हमेशा उपयोगी होता है।

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